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संभल के 68 तीर्थों पर पहली बार भव्य होली
इस बार संभल जिले में खोजे गए 68 तीर्थों पर पहली बार भव्य होली मनाई जाएगी। नगर हिंदू सभा, तीर्थ परिक्रमा समिति और मंदिर समितियों ने संयुक्त रूप से रंगोत्सव की तैयारी की है। सुबह शंखनाद और दोपहर में सामूहिक आरती के साथ उत्सव होगा। आयोजकों का कहना है कि यह केवल उत्सव नहीं बल्कि सांस्कृतिक पुनर्स्मरण का अवसर है।
जिले में होली प्रबंधन के लिए तीन सेक्टर बनाए गए
जिला प्रशासन ने पूरी व्यवस्था के लिए संभल को तीन सेक्टरों में बांटा है। कुल 64 जुलूसों की अनुमति दी गई है। प्रत्येक सेक्टर में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात रहेंगे। इससे भीड़ नियंत्रण और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि सभी तीर्थों पर रंगोत्सव शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।
संवेदनशील पृष्ठभूमि और सुरक्षा का अभेद्य घेरा
हाल ही में खामेनेई की मौत के बाद भारत में कुछ हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हुए। ऐसे में संभल प्रशासन ने सुरक्षा का विशेष इंतजाम किया है। पुलिस, आरक्षक और निगरानी टीमों को हर क्षेत्र में तैनात किया गया है। सभी कार्यक्रमों में आगंतुकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता है। धारा 163 लागू कर नियंत्रित आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
68 तीर्थों पर रंगोत्सव का सांस्कृतिक महत्व
आयोजकों ने कहा कि 68 तीर्थों पर रंगोत्सव केवल खेल-कूद का आयोजन नहीं है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्स्मरण का अवसर है। कई स्थानों पर सुबह शंखनाद, दोपहर में सामूहिक आरती और शाम को रंगखेल का आयोजन होगा। यह उत्सव स्थानीय लोगों और तीर्थ यात्रियों को एक साथ जोड़ने का माध्यम भी बनता है।
स्थानीय लोगों और तीर्थ यात्रियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
तीर्थों और मंदिरों के आसपास स्थानीय लोग और तीर्थ यात्री उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी रंगोत्सव में शामिल होंगे। आयोजकों का मानना है कि यह पर्व सामाजिक समरसता को बढ़ावा देगा। सभी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और सुरक्षा की भी विशेष व्यवस्था की गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।
भविष्य में संभल जिले के तीर्थ और पर्यटन विकास की संभावनाएं
प्रशासन और आयोजकों ने भविष्य में संभल जिले के तीर्थ स्थलों का पर्यटन और धार्मिक महत्व बढ़ाने की योजना बनाई है। रंगोत्सव जैसे कार्यक्रमों से धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा। स्थानीय दुकानदार और व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा। यह पहल संभल को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद करेगी।
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