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पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद परिसर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार के चुनाव में कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए अध्यक्ष और महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल की है। अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई उम्मीदवार शांतनु शेखर ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए निर्णायक जीत दर्ज की।
चुनाव परिणाम घोषित होते ही एनएसयूआई समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। विश्वविद्यालय परिसर में कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर और नारे लगाकर जीत का जश्न मनाया। समर्थकों ने इसे संगठन की एक बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि छात्रों ने विकास और मुद्दों की राजनीति पर भरोसा जताया है।
छात्रसंघ के केंद्रीय पैनल के कुल पांच पदों के लिए चुनाव कराया गया था। इनमें अध्यक्ष और महासचिव पद पर एनएसयूआई ने बाजी मारी, जबकि संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जीत दर्ज की। इस प्रकार दोनों प्रमुख छात्र संगठनों के बीच मुकाबला काफी रोचक रहा।
अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाले शांतनु शेखर ने चुनाव परिणाम आने के बाद छात्रों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं बल्कि पूरे छात्र समुदाय की जीत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रहितों को प्राथमिकता देते हुए विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और बुनियादी मुद्दों पर काम किया जाएगा।
महासचिव पद पर भी एनएसयूआई के उम्मीदवार ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कड़े मुकाबले में हराया। महासचिव पद के लिए एनएसयूआई और छात्र राष्ट्रीय जनता दल के बीच सीधी टक्कर रही, जिसमें एनएसयूआई उम्मीदवार को अधिक मत प्राप्त हुए। चुनाव परिणाम से स्पष्ट हो गया कि विश्वविद्यालय में एनएसयूआई की पकड़ मजबूत बनी हुई है।
वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल कर सभी को चौंका दिया। इस परिणाम ने यह संकेत दिया कि छात्र राजनीति में स्वतंत्र उम्मीदवारों का भी प्रभाव बना हुआ है। कई छात्रों ने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि छात्र केवल संगठन नहीं बल्कि उम्मीदवार की क्षमता को भी महत्व दे रहे हैं।
संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष पद पर एबीवीपी उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी उम्मीदवार ने एनएसयूआई उम्मीदवार को 400 से अधिक मतों के अंतर से हराया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि छात्रसंघ चुनाव में विभिन्न छात्र संगठनों के बीच संतुलन बना हुआ है।
मतगणना प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। परिणाम घोषित होने के बाद भी प्रशासन सतर्क रहा और जश्न के दौरान व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान दिया गया।
चुनाव के दौरान छात्रों में काफी उत्साह देखने को मिला था। मतदान के दिन बड़ी संख्या में छात्रों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। छात्र नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान छात्रावास की सुविधाएं, पुस्तकालय व्यवस्था, परिवहन और परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव का प्रभाव राज्य की राजनीति पर भी पड़ता है, क्योंकि यहां से कई छात्र नेता आगे चलकर मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय होते हैं। इस चुनाव के नतीजे आने वाले समय में छात्र राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष शांतनु शेखर ने कहा कि उनकी प्राथमिकता विश्वविद्यालय में शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाना और छात्रों की समस्याओं का समाधान करना होगा। उन्होंने सभी छात्र संगठनों से सहयोग की अपील भी की ताकि मिलकर विश्वविद्यालय के विकास के लिए काम किया जा सके।
कुल मिलाकर इस बार का छात्रसंघ चुनाव प्रतिस्पर्धात्मक होने के साथ-साथ शांतिपूर्ण भी रहा। चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि छात्र राजनीति में मुद्दों और नेतृत्व क्षमता को महत्व दिया जा रहा है। एनएसयूआई की जीत को संगठन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जबकि अन्य संगठनों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
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